Nehru's birth day, Baal Diwas

चाचा नेहरू ज़िंदाबाद !

हमारे नेहरू जी भारत के अनमोल रत्नों में से हैं जिन्होंने भारत माता के अनेकों सपूतों की तरह वह कुछ किया जो करने चाहिए थे। यह बात और है कि उन्होंने बहुत कुछ ऐसा भी किया जो नहीं करने चाहिए थे।

यह बात सत्य है कि कांग्रेस का गठन एलेन ह्यूम ने ब्रिटिश सरकार की नीतियों को आगे बढ़ाने के लिए अपनी भलाई के लिए किया था जिसके मार्फत भारतीय भी अपनीं बातें ब्रिटिश सरकार के सामने रख सकते थे। लेकिन कम ही भारतीय मामलों पर हुकूमत की ध्यान जाती थी। इससे अंगरेजी पढ़े लिखे अपने आप को बड़े मानने वाले लोग तो खुश थे कि उनकी उठ-बैठ अंग्रेजों के साथ होने लगी थी लेकिन वे निरंतर अंग्रेजों के दवाब में अंग्रेज हुकूमत के लिए काम करते थे। हिन्दू महासभा के अध्यक्ष रहे पंडित मदन मोहन मालवीय पहले ऐसे कांग्रेस के अध्यक्ष (1909) बने जो बेझिझक अपनी बात कह सकते थे। गांधी और नेहरू लगभग ४० साल बाद इस कांग्रेस से जुड़े। अनेकों देशभक्तों, जैसे बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय तथा बिपिन पाल समेत कईयों को कांग्रेस की ढुलमुल नीति बिलकुल पसंद नहीं थी I उन्हे ब्रिटिश सत्ता बिलकुल नामंजूर था और इसीलिए एक अलग 'गरम दल' बनाया और ब्रिटिश शासन से खिलाफत शुरू कर दी। सरकार धीरे-धीरे परेशान होने लगी और उन्हें महसूस हुआ कि गांधी के 'नरम दल 'से कुछ मामलों पर सहयोग करना चाहिए और तब से हिन्दुस्तानियों की आवाज़ सरकार के कानों तक पहुँचने लगी ।अब गांधी और नेहरू को भी लगने लगा था कि आज़ादी के सुर गाये जा सकते हैं। स्वतन्त्रता आंदोलन के दौरान दूसरे देशभक्तों की तरह उन्हें भी कई बार जेल जाना पड़ा था। हालाँकि प्रथम प्रधानमंत्री के लिए कांग्रेस के आतंरिक मतदान में सरदार पटेल को अधिकतम मत मिले थे, फिर भी गांधी जी ने नेहरू को प्रधान मंत्री बनाया I

नेहरूजी काफी दूरदर्शी थे। स्वतन्त्रता उपरान्त जब गांधी जी ने नेहरू को कांग्रेस को समाप्त या बर्खास्त करने की सलाह दी थी, नेहरू ने नहीं माना। वे जानते थी कि जल्द ही और भी राजनैतिक दल बनेंगे और तब कांग्रेस का 'आज़ादी की लड़ाई' का बर्चस्व वाला तगमा चला जाएगा। इसीलिए उन्होंने कांग्रेस को बर्खास्त नहीं किया। नेहरू जी ने कुछ अच्छे काम भी किए थे जिनमें भारत को तकनीकी रूप से सशक्त करना भी था हालांकि उनका प्रयत्न ज्यादा कार्यगर सावित नहीं हुआ। आधे अधूरे मन से काम किए गए थे। फिर भी इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि उन्होंने कुछ प्रयास तो अवश्य ही किए थे।

नेहरू जी की दूसरी दूरदर्शिता तब सामने आईं जब मुसलामानों के लिए पाकिस्तान बनने की बावजूद उन्होंने ने ढेर सारे मुसलामानों को 'कांग्रेस वोट बैंक' बनाकर भारत में ही रहने के लिए प्रेरित किया और लियाक़त समझौते के तहत उन्हें सुरक्षा भी देने का प्रण किया। लियाक़त मियाँ तो उस समझौते को भूल कर पाकिस्तान में हिन्दुओं को समाप्त करना शुरू कर दिया पर कांग्रेस की सहायता से भारत में मुसलमान न सिर्फ सुरक्षित रहे बल्कि इतना फलने-फूलने लगे कि कश्मीर को छोड़कर भी भारत के १२ जिलों में आज वे बहुसंख्यक हैं और हिन्दुओं को अपनी ही जमीन से पलायन करने को मज़बूर कर रहे हैं। मुसलमान रूपी कैंसर आज भारत को ही निगल रहा है।

नेहरू जी की तीसरी दूरदर्शिता कश्मीर में देखने को मिली जो पिछले चार दशकों से एक नासूर बना हुआ है। यह नेहरू और कांग्रेस की दूरदर्शिता ही है कि आज भारत के अंदर तीन भारत हैं। पहला 'क्षद्म-धर्मनिरपेक्ष' भारत जिससे हम दिन प्रतिदिन जूझ रहे हैं, जिसमें धर्म के नाम पर अधर्म का बोलबाला है I दूसरा 'मुस्लिम वैयक्तिक' भारत, जिसमें संविधान के "यूनिफॉर्म सिविल कोड" के बिपरीत मुसलामानों को अपना अलग व्यक्तिगत क़ानून बनाने और मानने की छूट दी गयी है। तीसरा 'ईसाई भारत' जिसके चर्च में भारतीय क़ानून नहीं मानते वल्कि वेटिकन रोम का शासन चलता है। विश्व भर में ऐसा बहुरूपिया शायद ही और कोई देश हो। नेहरू चाचा और कांग्रेस के दूरदर्शिता की जय हो।

नेहरू चाचा बच्चों के बहुत प्यारे थे क्योंकि भारत में आने वाती तबाही का उनको कोई आशंका नहीं थी। इसीलिए नेहरू जी के जन्म दिन को भारत 'बाल दिवस' मनाती है। यह नेहरू जी की दूरदर्शिता ही थी कि यहाँ बहुतेरे तकनीकी और नौरत्न संस्थान खुले। स्वतंत्र भारत के सामने सैकड़ों समस्याएँ थी जिसका उन्हेंने भरसक सामना किया।विदेश निति में उनकी पहल कुछ भ्रमित सी ही रही है। उनकी पहल से बना गुट-निरपेक्षता भारत के काम तो नहीं आया और आज के सन्दर्भ में अपनी पहचान खो चुका है।

नेहरू चाचा ने हमें काफी सारे नासूर भी दिए हैं।पहला तो उनके और कांग्रेस की लापरवाही है कि भारतीय विभाजन पश्चात यहाँ के ९.४ % मुसलमान आज ~१८ % के करीब है और अपने ही देश में हिन्दू अल्पसंख्यक बनते जा रहे हैं। जम्मू कश्मीर को छोड़कर भी भारत के १२ अन्य जिलों में हिन्दू अल्पमत में आ गए हैं और जल्द ही दो और जिलों में मुसलमान बहुसंख्यक हो जाएंगे।

यह उनकी दूरदर्शिता ही थी कि पाकिस्तान से भागनें वाले हिन्दू और सिख अपना सब कुछ गँवाकर यहाँ भाग आए परन्तु यहाँ से पलायन करने वाले मुसलामानों की सारी संपत्ति उनके 'वक्फ बोर्ड' के पास ही रहा, हमारे किसी शरणार्थी के काम नहीं आया। इसी तरह मिशनरियों के यहाँ से जानें के बाद उनकी भी संपत्ति चर्च को ही मिली ।

उन्हींने दूसरा नासूर जम्मू-कश्मीर में दिया है। पहले तो उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ विजयी होते और आगे बढ़ते भारतीय सेना को रोक कर एकतरफा युद्ध विराम घोषित कर कश्मीर का बड़ा सा भू भाग गँवा दिया। जम्मू-कश्मीर को अलग दर्जा देकर आने वाली पीढ़ी को एक सर दर्द दे दिया। जम्मू-कश्मीर के आतंरिक मामले को संयुक्त राष्ट्र में ले जाकर एक अंतर्राष्ट्रीय मुद्दा बना दिया जिससे हम आजतक जूझ रहे हैं।

तीसरे, उन्हेंने १९६२ की चीन के आक्रमण में भारतीय सेना के हाथ कुछ इस तरह बाँध दिए थे कि बेहतर होते हुए भी अपनी सेना को हार का मुँह देखना पड़ा। लद्दाख का एक बड़ा भू-भाग को चीन को अधिग्रहण कर लेने दिया। उधर उनहोंने भारत के लिए एक बड़ा मौका गँवा दिया जब संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद् की स्थाई सदस्यता लेने से इंकार कर दिया और यह सदस्यता चीन को दिए जानें की वकालत की। वही चीन आज हमारे सर पर बैठ कर तांडव कर रहा है। जय हो चाचा नेहरू की।

Chacha Nehru

अंततः अब लगता है कि कांग्रेस जिस मकसद से ह्यूम द्वारा बनाई गयी थी वह वही कर रही है। कोंग्रेसी १८८५ में भी हिन्दुओं के किसी काम के नहीं थे और आज भी इनको हिन्दुओं से घृणा है। वोट बैंक के लिए ये इतने गिर चुके हैं कि शांतिप्रिय हिन्दुओं को तालिबानी, मुस्लिम ब्ब्रदरहुड और ISIS का दर्जा देते हैं। यह तो हिन्दुओं का असीम सब्र ही है कि कोंग्रेसी नेताओं की घृणा बर्दास्त किये जा रहे हैं। आज कल हम जिस कांग्रेस को भारत में देख रहे हैं वह हिन्दू विरोधी, भारत विरोधी तथा भ्रष्टाचार से लिप्त है। इसके अधिकतर नेता जमानत की 'बेल गाड़ी' पर सवार हो जेल की तरफ अग्रसर हैं। यह कांग्रेस कट्टरवादी मजहबियों का समर्थक है जो देश विभाजन की ओर अग्रसर है। इस कांग्रेस की हमें कतई आवश्यकता नहीं है।

Corrupt Congress leaders on "Bail Gadi"

चाचा नेहरू ज़िंदाबाद !

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